ओ रे कृष्णा

ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे
पनघट पर पनिया भरत में
काहे छेड़े मोहे
मटकी फ़ोड़े
राहे रोके
निस दिन बरबस ही
आके टोके
जरा भी लाज शरम
न आये तोहे
ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे

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2 Comments

  1. Poonam singh - August 25, 2019, 6:04 pm

    Nice

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:58 am

    वाह बहुत सुंदर

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