ओ रोशनी ! चली आ….

ओ रोशनी! चली आ
बीता तम
हुआ सवेरा
जगमग कर दे यह जग
ओ प्रकाशपुंज !
भर प्रकाश जीवन में
पुष्पों की लालिमा से
महक उठे यौवन
ओ रोशनी ! चली आ
बीता तम
हुआ सवेरा…


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12 Comments

  1. neelam singh - April 7, 2021, 11:18 pm

    ओ रोशनी! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा
    जगमग कर दे यह जग
    ओ प्रकाशपुंज !
    भर प्रकाश जीवन में
    पुष्पों की लालिमा से
    महक उठे यौवन..

    वाह प्रज्ञा जी श्लेष, उपमा, अनुप्रास तथा विशोक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग
    प्रगतिवाद और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय किया है आपने

    बहुत ही सुंदर प्रोफेशनल रचना

  2. neelam singh - April 7, 2021, 11:18 pm

    प्रेरणादायक रचना

  3. Rishi Kumar - April 7, 2021, 11:29 pm

    अति सुंदर रचना

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 8, 2021, 9:21 am

    अतिसुंदर रचना

  5. Geeta kumari - April 8, 2021, 4:09 pm

    ओ रोशनी ! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा……… . बहुत खूब, प्रातः काल की बेला का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया है प्रज्ञा जी ने अपनी कविता में

    • Pragya Shukla - April 8, 2021, 11:01 pm

      धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ

  6. Ajay Shukla - April 9, 2021, 9:55 am

    शानदार प्रस्तुति

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