ओ सजीली रंगीली निशा !

तुम कितनी भोली हो बाला
तेरा कितना रूप निराला
मीठी-मीठी बातों से
तुम मुझको रोज रिझाती हो
सुबह होते ही तुम जाने कहाँ
गुम हो जाती हो !
सांझ होते ही मैं
तुम्हारी प्रतीक्षा करने लगता हूँ
क्योंकि तुम अपने साथ
यादों का सैलाब ले आती हो
ओ सजीली, रंगीली निशा !
तुम मुझको बहुत ही भाती हो…


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3 Comments

  1. vivek singhal - November 19, 2020, 10:54 am

    सुंदर शिल्प, भाव

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2020, 8:37 am

    सुंदर

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