औरत का सम्मान

औरत का सम्मान ,
कुछ इस कदर किया जाए
सरक जाए गर पल्लू गलती से,
तो, झुका नजर को लिया जाए ।

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Responses

  1. गीता जी, आपने इस कविता में उच्चस्तरीय विचार को प्रस्तुत किया है। जय हो। आपकी यही विलक्षण प्रतिभा आपको विशिष्ट कवि बनाती है। वाह

  2. समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी ।आपकी सराहना से ही मेरी लेखन को प्रोत्साहित करती हैं । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

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