कतरा ए गजल

कतरा ए गजल

तू मेरी चाहत आहत मेरा दिल कर दिया |
कह सर्वोपरि राहत मेरा दिल कर दिया |

तेरे हुश्न का चर्चा अब सरेआम हो रहा |
मै तेरा आशिक अब बदनाम हो रहा |

गुलाबी गाल होंठ लाल नैन कजरारे है |
काली जुल्फ़े गाल काला तिल बेकरारे है |

तेरे नजर के वार दिल घायल हुआ जाता है |
होंठो मंद मुस्कान कोई पागल हुआ जाता है |

आ बैठ मेरे पास हवाओ तेरी जुल्फ़े लहरा दूँ |
फलक के चाँद तारे तेरी जुल्फ़े गजरा लगा दूँ |

तुझसे है कितनी मोहब्बत तुझे मै बताऊँ कैसे |
दिल मे तु ही तू है तुझे मै अब दिखाऊँ कैसे |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो, झारखंड,मोब- 9955509286

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