कबाड़वाला

घर मे रद्दी सामान
जब इकट्ठा हो जाता है
तब कबाड़ वाला आता है
रद्दी सामान ले जाता है
कबाड़ वाले सुनो, सुनो
अनचाहे हमारे मन मस्तिष्क में भी
रद्दी सामान इक्कठा हो गया है
इनको भी लेते जाओ
मत देना दाम
यह रद्धी सामान हमे दीमक की तरह
खाए जा रहा है
ढोलक की तरह बजाए जा रहा है
कहा कबाड़वाले ने
हो जाएगा काम
बदले में दूँगा दाम
क्यूँकि बाजार में इसकी ही
मांग है
आज कल

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Responses

  1. यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती आपकी बेहद शानदार रचना

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