करूणा बरसा जाओ

हर हर महादेव
अब संघार बहुत हुआ
थोङी सी करूणा बरसा जाओ।
कहलाते हो औघरदानी
तुम सन भला कौन विज्ञानी
इस व्याधी से, हर परेशानी से
मानवता को निजात दिला जाओ ।
देख तेरे सुत बिलट रहे हैं
कण-कण को वे तरस रहे हैं
जीजिविषा है जीने की पर
मौत के मुँह में सरक रहे हैं
निराधार हैं, आधार दिला जाओ
थोङी सी करूणा बरसा जाओ।


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2 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:18 pm

    अतिसुंदर

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