कर्जदार होते जा रहे हैं

जख्मों को हमारे वह
कुरेदते जा रहे हैं,
कुछ इस तरह वह
मुझे आजमा रहे हैं।
मेरी रूह में सांस
धुंधली हुई जाती,
हम उनकी मोहब्बत के
कर्जदार होते जा रहे हैं।

Published in शेर-ओ-शायरी

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