कर क्षण का उपयोग तू

क्षण में जीना सीख ले, क्षण जाता है बीत।
रुकता नहीं एक भी क्षण, चलना इसकी रीत।
कर क्षण का उपयोग तू, पीछे की सब भूल,
अभी अभी है जिन्दगी, आगे पीछे शूल।
क्षण मत खोना बावरे, नशे-नींद में चूर,
जग जा पल पल भोग ले, जी ले तू भरपूर।
आते रहते दिन सदा, जाती रहती रात,
बचपन यौवन बन रहे, बस बीती सी बात।
जो है सब कुछ अभी है, अभी आज में खेल,
अभी सजी है रोशनी, है दीपक में तेल।
कल का किसको ज्ञान है, दीपक रहे कि तेल,
अभी चल रही धड़कनें, अभी आज में खेल।


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5 Comments

  1. Devi Kamla - January 22, 2021, 10:52 pm

    वाह, क्षण में जीने की सीख देते शानदार दोहे

  2. Piyush Joshi - January 23, 2021, 7:46 am

    वाह सर बहुत खूब

  3. Anu Singla - January 23, 2021, 8:30 am

    बहुत खूब लिखा है आपने

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 23, 2021, 9:37 am

    बहुत खूब

  5. Geeta kumari - January 24, 2021, 10:32 am

    समय का सदुपयोग करने का संदेश देते हुए कवि सतीश जी की बहुत
    ही खूबसूरतत दोहा रचना।

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