कल्पना और हकीक़त

कल्पना की दुनियां,
बहुत ख़ूबसूरत
हकीक़त इससे कहीं तो जुदा है
कभी मेल खाती, कभी दूर जाती
हकीक़त की दुनियां है,
कल्पना सी कहां है ..

*****✍️गीता


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7 Comments

  1. Pragya Shukla - October 17, 2020, 1:03 pm

    बिल्कुल सही कहा आपने

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 17, 2020, 5:48 pm

    अतिसुंदर

    • Geeta kumari - October 18, 2020, 5:55 am

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏 बहुत बहुत आभार

  3. Satish Pandey - October 17, 2020, 7:14 pm

    वाह, कवि गीता जी की बेहतरीन अभिव्यक्ति। भाषा और शिल्प दोनों की दृष्टि से अति उत्तम

    • Geeta kumari - October 18, 2020, 5:34 am

      कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
      इन प्रेरक पंक्तियों से मेरा उत्साह वर्धन हुआ है , धन्यवाद सर..

  4. Suman Kumari - October 17, 2020, 10:46 pm

    सुन्दर रचना

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