कविता कहना छोड़ा क्यों ?

ओ !! प्रियतम मेरे
तू ही बता,
मेरा मन इतना
विचलित क्यों ?
मैं सच के पथ से
विचलित क्यों ?
जो दर्द उठाता कल तक
आवाज उठाता था कल तक
वह दर्द उठाना छोड़ा क्यों ?
कविता कहना छोड़ा क्यों ?
संसार की बातों में आकर
क्यों उल्टी-पुल्टी सोच रखी
इन आँखों में पर्दा रख कर
तेरी अच्छाई भूला क्यों ??
ओ !! प्रियतम मेरे
तू ही बता,
मैं सच के पथ से
विचलित क्यों ?
——- डॉ. सतीश पांडेय


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8 Comments

  1. Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:44 pm

    प्रश्न अलंकार का प्रयोग।
    कवि ने अपने ह्रदय में उठती उथल-पुथल को कविता के माध्यम से व्यक्त किया है।
    तथा अनुप्रास अलंकार का प्रयोग

  2. Antariksha Saha - July 31, 2020, 10:24 pm

    बहुत खूब

  3. Geeta kumari - July 31, 2020, 10:52 pm

    सुंदर रचना

  4. Indu Pandey - August 1, 2020, 10:00 am

    बहुत ही सुन्दर

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