कहां आ गए हैं हम।

कहां आ गए हैं हम,
जहां खामोश-सी शामें हैं।
और चुप-सा सूरज उगता है।
ना बांटता है मुस्कान,
ना रौनकें फैलाता है।

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Responses

  1. Aayhay…
    लाजवाब, जबरदस्त, बहुत खूब और कितनी तारीफ करूं बस इतना ही आता है…

  2. मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो,
    अनुभवों से सीख लो और निखर कर चलो।
    कठिनाइयाँ तो आएंगी और चली जाएंगी,
    सजग होकर इसी तरह नए सफ़र पर चलो।

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