कहावतें

दुनिया में ‘चेहरे पर चेहरा चढ़ाए’ हुए लोग।
‘मुंह में राम बगल में छुरा’ छिपाए हुए लोग।
‘अपने मुंह मियां मिट्ठू’ बनते हुए देखे हैं,
‘नाच ना आवें आंगन टेढ़ा’ बताए हुए लोग।
‘पूत के पांव पालने में ही नजर आते हैं’,
फिर भी ‘सपोले को दूध पिलाए’ हुए लोग।
यूं तो ‘आस्तीन के सांप’ नज़र नहीं आते,
अपनों ही से ‘मुंह की खाए’ हुए लोग।
‘दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीता है’,
फिर भी ‘यकीन पर दुनिया टिकाए’ हुए लोग।
‘दूध का दूध पानी का पानी’ हो ही जाता है,
‘सांच को आंच नहीं’ सिद्ध कराए हुए लोग।
‘चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए’ ऐसे भी हैं,
‘आम के आम गुठलियों के दाम’ भुनाए हुए लोग।
‘बाल की खाल निकालना’ आदत है जिनकी,
देखो ‘बात का बतंगड़’ बनाए हुए लोग।
‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’ कहते हैं,
‘बंदर के हाथ उस्तरा’ पकड़ाए हुए लोग।
‘गड़े मुर्दे उखाड़ना’ फितरत है जिनकी,
‘सांप जाने पर भी लकीर पिटाए’ हुए लोग।
‘दूर के ढोल सुहावने’ ही सुनाई देते हैं,
करीब से ‘ढोल की पोल’ खुलाए हुए लोग।
‘भैंस के आगे बीन बजाने’ का फायदा नहीं,
‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ कराए हुए लोग।
सदैव ‘सब्र का फल मीठा ही होता है’,
अमल कर ‘चैन की बंसी बजाए’ हुए लोग।

देवेश साखरे ‘देव’

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10 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 17, 2019, 11:28 am

    मुहावरों का सही प्रयोग

  2. Poonam singh - October 17, 2019, 12:39 pm

    Kya bat

  3. nitu kandera - October 17, 2019, 10:36 pm

    Good

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