कहीं पे दिल तो कहीं पे निशाना

हम इतने भी नादान नहीं थे, जितना की वो मुझे समझते थे।
कस्मे वादे मुझ से करते थे, इश्क़ जनाब कहीं और फरमाते थे।।


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4 Comments

  1. Pratima chaudhary - September 17, 2020, 11:51 am

    बहुत खूब

  2. Satish Pandey - September 17, 2020, 12:40 pm

    सुन्दर, अतिसुन्दर

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 17, 2020, 2:20 pm

    बेहतरीन

  4. Geeta kumari - September 17, 2020, 2:45 pm

    Nice lines

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