कितनी कशिश थी..

कितनी कशिश थी,
उनकी मासूमियत में।
भूल जाते थे सारा जहां।
जो बदल गए अब,
एक तूफान के बाद।
अब न झलक मिलती है,
ना निशान दिखते हैं।..


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22 Comments

  1. Geeta kumari - September 21, 2020, 12:34 pm

    बहुत ख़ूब

  2. Vasundra singh - September 21, 2020, 12:58 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Pragya Shukla - September 21, 2020, 2:51 pm

    लाजवाब डियर

  4. प्रतिमा चौधरी - September 21, 2020, 6:01 pm

    Thank you

  5. Satish Pandey - September 21, 2020, 6:13 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  6. Praduman Amit - September 21, 2020, 7:12 pm

    दिल को परखो चेहरे को परखे तो क्या परखे।
    यही चेहरे ने लाखों को लूटा अब तुम समझे।।

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 21, 2020, 10:34 pm

    सुंदर

  8. Rishi Kumar - September 21, 2020, 11:13 pm

    👌👌👌

  9. Anil Pandey - September 22, 2020, 11:49 am

    waw🙏

  10. मोहन सिंह मानुष - September 22, 2020, 1:18 pm

    बहुत उम्दा

  11. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 10:23 pm

    वाह

  12. Anonymous - September 30, 2020, 11:47 pm

    Sahi hai

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