“किरदारों का रंगमंच”

ना जाने किन खयालों में
खोई रहती है दुनिया
मेरा-मेरा करती रहती है दुनिया
अपनी तो देह भी साथ नहीं देती
सब कुछ यहीं रह जाता है
फिर किस मद में चूर रहती है दुनिया
भाई हो या जीवनसाथी हो
कोई साथ नहीं जाता
बस दो-चार दिन जनाजे पर
रो लेती है दुनिया
कमा-कमाकर नोटों के
गट्ठर लगा लेते हैं सब
एक कौड़ी भी साथ नहीं जाती
जब छूट जाती है दुनिया
ऊपरवाले को कोई याद नहीं करता
जिसने बनाई है ये सुंदर-सी दुनिया
महज छलावा है जग में, सब नश्वर है
किरदारों का रंगमंच बस है दुनिया…


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6 Comments

  1. Geeta kumari - October 22, 2020, 12:35 pm

    सत्य वचन महाराज ,पर इस उम्र में ये सोच?? 🤔

    • Pragya Shukla - October 22, 2020, 9:25 pm

      हाहाहा..
      मेरा तो मन करता है दुनियादारी से सन्यास लेलूं और साध्वी बन जाऊं…

      • Geeta kumari - October 22, 2020, 9:40 pm

        “ऐसा ना करना बहन,यदि मानो मेरी
        आगे मर्ज़ी तुम्हारी ……”
        प्लीज़ मत करना चाहे मर्ज़ी भी हो ।

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 22, 2020, 3:08 pm

    अतिसुंदर

  3. Satish Pandey - October 22, 2020, 9:51 pm

    लाजवाब, उम्दा

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