किश्तों की मुहब्बत !

किश्तों में ही मिली, तेरी मुहब्बत हमें।
जो ना मासिक थी, न ही सालाना।

पल दो पल की मुलाकातें थीं।
ना रूठना हुआ, ना मनाना।

कभी एक-मुश्त मिले होते, तो हम करते जी भर के दीदार तेरा।
पर शायद हमारे नसीब में ही नहीं था प्यार तेरा।


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10 Comments

  1. Pragya Shukla - September 23, 2020, 7:35 pm

    बहुत सुंदर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 23, 2020, 8:21 pm

    बहुत खूब

  3. Geeta kumari - September 23, 2020, 9:50 pm

    Nice lines

  4. Suman Kumari - September 23, 2020, 9:58 pm

    सुन्दर

  5. प्रतिमा चौधरी - September 24, 2020, 1:58 pm

    बहुत उम्दा

  6. Anuj Kaushik - September 24, 2020, 7:07 pm

    अति सुन्दर

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