किसान आंदोलन

जिस बंदे ने तुम्हारी परोसी थाली है,
पर मजबूरन आज उसी की थाली खाली है।
और समझो धूप बरसात गर्मी -ठण्डी उन दताओ की
वरना राजनीति के चेहरे पर कालिख है।

कल जो बादल वर्षा करते रहते थे
कल तक जो तुमको थाली परसा करते थे
वो आज गरज-बरस कर राजनीति पर आये है
समझो तुम राजनेताओं तुम पर काले साये है।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. Geeta kumari - February 20, 2021, 5:59 pm

    किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 20, 2021, 7:45 pm

    वाह

  3. Satish Pandey - February 22, 2021, 2:58 pm

    बहुत सुंदर, अति उत्तम रचना

Leave a Reply