किसी सूरत में नहीं किसान

खाली दिमाग शैतान का
खाली बैठे रहे बेईमान
निकम्मे निठल्ले हरामखोर वे
किसी सूरत में नहीं किसान

रंगे सियारों जैसे बनकर
शरीफों को कर रहे बदनाम
सार्वजनिक संपत्ति पे निर्माण
हैवानों का है यह काम…..

सूरबीर अकेले ही चलता
सबके हित की सदा करता
भेड़ बकरी के झुंड सदा
तपस्या में डालते ब्यवधान

भीड़ देख बुद्धू अक्सर
आकर्षण में बंध जाते हैं
उत्सुकतावश काम छोड़कर
कीमती वक्त करते अवसान

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. देश की समसामयिक सोचनीय स्थिति का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई संजीदा रचना

New Report

Close