कुछ टूट सा गया है

ना मुस्कुराएंगे कभी वैसे,
मुस्कुराते थे कभी जैसे
कुछ टूट सा गया है अंदर ,
दिखाई देगा नहीं बाहर से ।।

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Responses

  1. आपके द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ लाजवाब हैं। मन की टूटन का सहज और सरल तरीके से सुन्दर चित्रण किया गया है।

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