कुछ समझ आता नहीं

किस तरफ की बात बोलूं
कुछ समझ आता नहीं,
सत्य क्या है झूठ क्या है
कुछ समझ आता नहीं।
एकतरफा बात सुनकर
धारणा कुछ और थी
दूसरे के पक्ष को सुन
कुछ समझ आता नहीं।
बाहरी आभा सभी की
खूबसूरत मस्त दिखती
भीतरी हालत है कैसी
कुछ समझ आता नहीं।
पक्ष की अपनी हैं बातें
फिर विपक्षी की दलीलें
कौन सच्चा देशसेवी
कुछ समझ आता नहीं।
ठंड में ठिठुरा हुआ हूँ
गर्म मौसम में झुलसता,
कौन सा मौसम सही है
कुछ समझ आता नहीं।
पहले बचपन फिर जवानी
सब अवस्था देखकर
कौन सी स्थिति सही है
कुछ समझ आता नहीं।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

बचपन

जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा…

Responses

New Report

Close