कोपल दया की अब तो

कोपल दया की अब तो,
उग जा,
नमी नमी है,
बरसात का यौवन,
किस बात की कमी है।
अब तो हवा भी सूखी-सूखी
नहीं है बिल्कुल।
आकाश भी है गीला
गीली हुई जमीं है।
अब भी तुझे प्रतीक्षा
किसकी है तू बता दे,
ममता दया के अंकुर
कह दे कहाँ कमी है।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ, लाजवाब अभिव्यक्ति भाव और शिल्प का सुन्दर समन्वय

New Report

Close