कोशिश है भाव पढ़ लूँ

नजरें टिकी हैं तुम पर
कोशिश है भाव पढ़ लूँ
पाने को पार मन का
पत्थर की नाव गढ़ लूँ।
उतरे या डूब जाये
कोशिश कभी न छोडूँ
तुम छोड़ना भी चाहो
मन से कभी न छोड़ूँ।
ऐसे ही सब समझ लूँ
कहना जो चाहते हो,
वह भी मैं भांप लूँ जो
कहना न चाहते हो।

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

Related Articles

सफ़र छोड़ना पड़ा

सौ बार सरे-राह सफ़र छोड़ना पड़ा।। मंज़िल पे हर परिन्द को पर छोड़ना पड़ा।। पुश्तैनी घर की जब मेरे दहलीज़ गिर पड़ी घर को बचाने…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close