कौन है सच्चा कौन झूठा…!!

कौन है सच्चा कौन है झूठा
यह तो है किस्मत का फेर
तू अच्छा बनके खेलता
है नफरत का खेल,
है नफरत का खेल खेलता
तू अच्छा बन,
बनकर तू अच्छा दिखला ना बच्चा बन
ना बच्चा बन तू ऐसे पकड़ा जाएगा
किसी दिन तेरा यह खेल तुझी पर उल्टा पड़ जाएगा।।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. वो दिन दूर नहीं
    मुंह की वो खाएंगे
    तभी से अच्छे दिन भी आएंगे

    1. आपकी इतनी सुंदर समीक्षा से मन गदगद हो उठा शब्द नहीं मिल रहा है आपको धन्यवाद बोलने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका मेरी हौसला अफजाई के लिए

  2. दो गले लोगों तथा आस्तीन के सांपों पर
    सुंदर तथा सटीक
    व्यंजना की है आपने,
    एसे लोग समाज के लिए
    अत्यंत घातक सिद्ध होते हैं

  3. दोगलेपन का बहुत ही सच्ताई से वर्णन करती हुई कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना

    बहुत सुंदर शिल्प बहुत सुंदर भाव और लाजवाब अभिव्यक्ति प्रस्तुत करती हुई है एक शानदार रचना

New Report

Close