क्या पता ..

किस मोड़ पर मंज़िल
कर रही है इन्तज़ार,
क्या पता …
किस राह में हो जाए
दीदार-ए यार
क्या पता…
जीत एक रास्ता है,
हार एक अनुभव
है जीवन का।
कल क्या हो,
किसी को क्या पता…
____✍️गीता

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Responses

  1. किस मोड़ पर मंज़िल
    कर रही है इन्तज़ार,
    क्या पता …
    किस राह में हो जाए
    ——– बहुत ही सुंदर रचना। उच्चस्तरीय भाव।

  2. सच है गीता जी कल किसने देखा है। किंतु आज को संवारने की कोशिश ज़रूर हमारे हाथों में है।

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