*क्या हुआ..है मौसम को*

क्या हुआ..
आज मौसम को,
बादल ही बादल हैं गगन में,
सूरज भी नहीं दिखा,
सर्दी बढ़ती ही जा रही
जाने क्या है इसके मन में,
धूप का ना नामो-निशां
कहां छिपी हैं सूर्य-रश्मियां,
थोड़ी सी तपन दे जाती
इस ठंडी-ठंडी पवन से,
कुछ तो राहत मिल जाती
_____✍️गीता


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6 Comments

  1. Satish Pandey - January 13, 2021, 10:59 pm

    कवि मौसम की सुरम्यता से स्वयं को अछूता नहीं रख सकता है। बदलते मौसम पर बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं गीता जी।

    • Geeta kumari - January 14, 2021, 8:53 am

      कविता की इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 14, 2021, 7:45 am

    अतिसुंदर भाव

  3. Piyush Joshi - January 14, 2021, 8:23 am

    अति उत्तम

  4. Geeta kumari - January 14, 2021, 8:54 am

    बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

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