क्यूँ

यह जख्म कोई नया तो नहीं
फिर दर्द का अहसास
इतना गहरा क्यूँ ?
कयी सितम अपनों ने किये
पर उफ ना आज तक हमने किये
अबतलक जो बेधते लब्ज़
असर कर न सके
तेरे लव से सुनते ही
हम सह न सके
तुझसे मिले अलफाज
दे गया सदमा क्यूँ ?
पल-पल चोट मिलते रहे
शिकायतें करने की फितरत नहीं
कहने को बहुत कुछ हमको मिला
कुछ और पाऊँ ये हसरत नहीं
बढ़ते जा रहे कदम-दर-कदम
खत्म होता नहीं रास्ता क्यूँ ?


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 4, 2020, 1:22 pm

    सुंदर

  2. Satish Pandey - December 4, 2020, 10:09 pm

    बहुत खूब, सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Rishi Kumar - December 5, 2020, 7:21 am

    सुंदर

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