खाली

तुमको सुलाने की खातर कितनी रात मेरी काली रही,
मुझे ठीक से याद नहीं के देखकर तुम्हें बेखयाली रही,

बातें करती रहीं तुम मुझसे यूँही सपनों की दुनियां में,
सुबह जब तुमने मुझे देखा आँखें तुम्हारी सवाली रही,

किसी रस्सी सा खींचते रहे सब अपने हिसाब से तुम्हें,
मुट्ठी में बाँधके रखा तुम्हें पर हथेलियाँ मेरी खाली रही।।

राही अंजाना

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10 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 1, 2019, 10:47 pm

    वाह जी वाह

  2. Poonam singh - October 2, 2019, 11:29 am

    Nice

  3. Sahendra Singh - October 2, 2019, 3:52 pm

    वाह जी लाजवाब

  4. Shyam Kunvar Bharti - October 2, 2019, 10:27 pm

    बहुत खूब

  5. nitu kandera - October 4, 2019, 10:19 am

    Nice

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