खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

तुझसे कहां कुछ कह पाती हूं मैं
जब भी तुम होते हो सामने
खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

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3 Comments

  1. Dharamveer Verma - August 19, 2019, 8:54 am

    बहुत अच्छा लिखती हैं, नीलम जी आप।

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:01 pm

    वाह बहुत सुंदर

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