खुद पर रख विश्वास

मगन हुआ मन आज है, उछल रहा उत्साह,
जीवन जी लूँ खुश रहूँ, खुद पर रख विश्वास।
खुद पर रख विश्वास, बढ़ूँ, प्रसन्न रहूँ मन,
जो दे ईश उसी में हो संतोष मेरा धन।
कहे लेखनी सत्य, भरा विस्तार गगन,
इसीलिए तो हुआ, आज मन खूब मगन।


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5 Comments

  1. Rishi Kumar - April 6, 2021, 8:38 pm

    वाह क्या बात है सर खूब लिखा है आप ने

  2. Geeta kumari - April 6, 2021, 9:16 pm

    कहे लेखनी सत्य, भरा विस्तार गगन,
    इसीलिए तो हुआ, आज मन खूब मगन।
    _________ सत्य और विश्वास की और प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की छंद शैली में बहुत श्रेष्ठ रचना, अति उत्तम लेखन… वाह

  3. Chandra Pandey - April 7, 2021, 8:17 am

    बहुत शानदार रचना

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 7, 2021, 3:20 pm

    बहुत सुंदर

  5. Pragya Shukla - April 7, 2021, 10:41 pm

    बहुत ही सुंदर छंदयुक्त रचना

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