*खेतों की हरियाली*

देख के खेतों की हरियाली,
नव-प्रभात ऊषा की लाली
मन विभोर हो उठा है मेरा,
मन मचले मत जा यहां से
कितना सुन्दर गांव है मेरा
पीली-पीली ओढ़ ओढ़नी,
सरसों खड़ी मुस्काए
मीठे गन्ने की पत्ती लहराकर,
अपनी ओर बुलाए
शुद्ध पवन है, ना कोई शोर
कोयल कूके मेरे खेत में,
नृत्य कर रहे हैं मोर
तस्वीर बसा ली आंखों में,
मैंने मेरे गांव की
खेतों की हरियाली की
और उस नीम की छांव की

*****✍️गीता


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8 Comments

  1. Pragya Shukla - November 22, 2020, 5:22 pm

    सुंदर शिल्प एवं भाव के साथ गीता जी ने
    गाँव और प्रकृति का
    मनोहर चित्र प्रस्तुत
    किया है जो सराहनीय है

    • Geeta kumari - November 22, 2020, 8:23 pm

      इस सुन्दर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. Satish Pandey - November 22, 2020, 9:26 pm

    वाह, गांव की सुंदरता का बेहतरीन चित्रण

    • Geeta kumari - November 22, 2020, 10:22 pm

      सुन्दर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  3. Rishi Kumar - November 23, 2020, 11:26 am

    Very good

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 25, 2020, 7:58 am

    अतिसुंदर भाव

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