ख्वाहिशें !!!

ख्वाहिशें थी तुम्हें पाने की साहब !
पर बदनामी के सिवा कुछ ना हाथ आया..

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Responses

  1. दिल की बातों को कैसे कागज़ पर इतनी खूबसूरती से उतार लेती हो।
    कमाल का हुनर है।

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