ख्वाहिश

हम बेकार में ही परेशान हो गए
उनकी नजर अंदाजी से
उनकी ख्वाहिश तो हमसे दूर हो
हमें अर्श पर पहुंचाने की थी

Related Articles

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर…

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने…

Responses

  1. नजरें जब तीरंदाज़ी का हो
    तब समझना कुछ होने वाला है।
    बदलाव जीवन में जल्द ना सही
    वक्त में चार चाँद लगने वाला है।।

  2. परेशान करने वाला कब चैन से जीता है
    खुद के बिछाए जालों में खुद ही फँसता है

New Report

Close