गठबंधन

तीन छात्र थे केवल कक्षा में।
आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।।
प्रथम श्रेणी में पास किया एक
दूजा द्वितीय दर्जे को पाया।
तीजा तेतीस फीसदी लाकर
तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।।
अफसोस कि तीनों आखिर
छात्रवृत्ति से कुछ दूर रह गए।
बासठ पर पहला अटका है
छप्पन पर मगरुर रह गए।।
सोच में देख दोनों को तीजा
लगा ठहाका जोर से बोला।
मिले वजीफा पच्चासी पर
फिर क्या मुश्किल है भोला।।
बारी -बारी तुम दोनों से
गठबंधन आ मैं करता हूँ।
छःछः मास तुम दोनों संग
निज लब्धांक शेयर करता हूँ।।
पौ बारह में रहेंगे तीनों
आखिर इसी आधार पर।
लोकतंत्र सरकार यहाँ
जब बनती इसी आधार पर।।
हमें तो चाहिए कुछ पैसे
आखिर पढ़ने के खातिर।
इनको तो सबकुछ मिलता है
वेतन पेंशन सुविधा आखिर।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

2 Comments

  1. Geeta kumari - January 21, 2021, 2:33 pm

    बहुत खूब , सरकार के सिस्टम का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई कवि विनय शास्त्री जी की बहुत ही सुन्दर और सटीक व्यंग्यात्मक रचना। लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. Satish Pandey - January 21, 2021, 10:11 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

Leave a Reply