गति

क्या करूँ क्या न करूँ
उथल पुथल सी होती है

मन में हर दम
एक गति सी होती है

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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गति

उथल पुथल सी होती है क्यों, मन की गति को रोक सही भटक भटक कर थक गया, स्थिर हो तू बैठ कहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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