गीत – इश्क ए शैलाब |

गीत – इश्क ए शैलाब |
उफनते हुश्न ए शैलाब मुझे बहा न देना तुम |
शराबी नजरों शबाब ए जाम डूबा न देना तुम |
मै मरीज ए इश्क तेरा मर्ज ताजा ही रहेने दो |
जलती आग मोहब्बत की बुझा न देना तुम |
देखा नही हुश्न तुझसा सर से पाँव लबालब |
बिठा रखा सिर आंखो मुझे गिरा न देना तुम |
लिखा दिल पे नाम तेरा खून की रोशनाई से |
रौंदकर पैरो तले तेरा नाम मिटा न देना तुम |
इधर उधर जिधर नजर मगर कहा नही है तू |
चाहा टूटके तुझे तोड़के दिल भुला न देना तुम |
याद क्या करना तुझे भूलने की फुर्सत तो मिले |
गुजरे बगैर तेरे जिंदगी दिन दिखा न देना तुम |
चाँद तारे न मांगो झुका दूँ फलक कदमो तेरे |
मै ही तेरी जिंदगी गैर मांग सजा न लेना तुम |
नजर उठे सहर झुके तो शबब शाम हो जाये |
लहरा जुलफ़े बन घटा वर्षा भिंगा न देना तुम |
हाल दिल न पुछो मांग लो जान हँसके दे दु |
देख दिवानापन भारती अब मजा न लेना तुम |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक / गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब -9955509286

Published in ग़ज़ल

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