गुरूर है

देर मिलता है, पर मिलता जरूर है।
किस्मत पे अपने, इतना तो गुरूर है।

खामोशी मेरी, लगने लगी कमजोरी,
रहम दिल हूं, बस इतना कुसूर है।

छत है सर, फिर भी हूं बेघर,
घर जिनके हैं, वो कितने मगरूर हैं।

हैं सब, पर कोई भी नहीं अब,
सोच है मेरी, या मेरा फितूर है।

हर हाल में, करुं ना मलाल मैं,
नफरत से तो ‘देव’ होते सभी दूर हैं।

देवेश साखरे ‘देव’

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14 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 19, 2019, 7:03 am

    वाह

  2. NIMISHA SINGHAL - September 19, 2019, 7:15 am

    Good one

  3. Poonam singh - September 19, 2019, 11:15 am

    Wahh

  4. राम नरेशपुरवाला - September 19, 2019, 3:36 pm

    Bahoot khub

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 19, 2019, 5:32 pm

    वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  6. ashmita - September 19, 2019, 10:46 pm

    Nice

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