गुड़िया रानी

उठ मेरी छोटी सी गुड़िया
सुबह हो गई उठ जा अब
बाहर सूरज चमक रहा है
सुबह हो गई उठ जा अब।
अपनी सुन्दर बाल लीलाओं
से महका गुड़िया रानी
अभी बोलना सीख न पाई
करने लग जा शैतानी।
दिन-दिन बढ़ते चले जा रहे
छठा माह आया लगने,
आज हमारी गुड़िया रानी
पलट रही खुद के कहने।


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4 Comments

  1. Geeta kumari - August 2, 2020, 9:52 am

    अरे वाह, पिता के स्नेह को दर्शाती वात्सल्य से परिपूर्ण सुंदर रचना

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 2, 2020, 10:43 am

    वाह

  3. Pragya Shukla - August 2, 2020, 1:37 pm

    वाह-वाह

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