घोर कलियुग है देख पाप प्रबल

✍?(अंदाज )?✍
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घोर कलियुग है देख पाप प्रबल
चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल

दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित
मन मे मैल देख बेईमानी सबल

स्वभाव मे मिठास बोली मे छल
दिखावा ठोस देख बुध्दि मे नकल

कपट भाव है अंतस मे रचा-बसा
आचरण मे नाटक का देख अकल

आपसी मेल मिलाप मे छुपा स्वाथं
मानव मे चाल देख कुटिल सफल

श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
(दिनांक -26-04-2018)


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2 Comments

  1. राही अंजाना - May 6, 2018, 5:08 pm

    Waahbandaaz

  2. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 11:47 am

    Good

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