चरण वंदना

तेरा सब तुझको अर्पण,
तू दे दे मुझे सहारा।
क्यों रूठा है तू भगवान
अब थाम ले हाथ हमारा
है नाव भंवर में मेरी
तू ही पतवार ,किनारा
मांझी बनकर नैया की,
तू बन जा खेवन हारा।
निमिषा सिंघल

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close