चलना

क्यों बुझे हैं ,द्वीप ह्रदय के
तुझे जग आलोकित ,है करना

नव उमंग उत्साह लिए,
प्रति पल बाधा से है लड़ना

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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