चार राखी लाना पापा

चार राखी लाना पापा
अबकी रक्षाबन्धन में।
बड़े प्यार से बांधूगी मैं
वीरों के अभिनन्दन में।।
पहली राखी बांधूगी मैं
भारत के वीर शहीदों को।
दूसरी राखी बांधूगी मैं
शरहद के वीर सपूतों को।।
तीसरी राखी बांधूगी मैं
अपने प्यारे भ्राता को।
चौथी राखी बांधूगी मैं
अपने जन्मदाता को।।
‘विनयचंद ‘ इन चारों से
हम हैं सदा सुरक्षित।
इनका करें सम्मान सदा
रखकर इन्हें सुरक्षित।।


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4 Comments

  1. Satish Pandey - August 1, 2020, 10:19 pm

    बहुत खूब

  2. Pragya Shukla - August 1, 2020, 10:30 pm

    मार्मिक

  3. Geeta kumari - August 1, 2020, 10:44 pm

    उत्तम विचार👏

  4. मोहन सिंह मानुष - August 2, 2020, 6:40 am

    बहुत बढ़िया

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