चार राखी लाना पापा

चार राखी लाना पापा
अबकी रक्षाबन्धन में।
बड़े प्यार से बांधूगी मैं
वीरों के अभिनन्दन में।।
पहली राखी बांधूगी मैं
भारत के वीर शहीदों को।
दूसरी राखी बांधूगी मैं
शरहद के वीर सपूतों को।।
तीसरी राखी बांधूगी मैं
अपने प्यारे भ्राता को।
चौथी राखी बांधूगी मैं
अपने जन्मदाता को।।
‘विनयचंद ‘ इन चारों से
हम हैं सदा सुरक्षित।
इनका करें सम्मान सदा
रखकर इन्हें सुरक्षित।।

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

लॉक डाउन २.०

लॉक डाउन २.० चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस, माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच । देश के नाम संबोधन, पहुंचा हर जन तक । कई…

Responses

New Report

Close