चाहत

सोचा था अपनी मुकद्दर को एक नया नज्म देंगे।
उन्हीं नज्म के आर में हम उनकी दास्तां लिखेंगे।।

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￰वतन

वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,, सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।। जहाँ पानी बहाना है वहां पर…

वतन

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