चीन की कठपुतली बनकर

चीन की कठपुतली बनकर
कब तक ऐसा व्यवहार करोगे,
लड़ना है तो खुलकर आओ
कब तक छिपकर वार करोगे।
पाकिस्तान, नेपाल आदि तुम
अभी समय है संभल भी जाओ,
दूजे की बंदूक उठाकर
कब तक यूँ प्रहार करोगे।
लालच देकर भुला रहा है
ये लो रोटी, लो बारूद
कब तक ड्रैगन के लालच में
खुद को तुम बर्बाद करोगे।
बहुत कर चुके हो सिरदर्दी
आतंकी साजिश घटिया सी,
अब भारत को व्यथित मत करो
वरना खुद को बर्बाद करोगे।


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20 Comments

  1. MS Lohaghat - October 18, 2020, 7:27 pm

    बहुत ही बढ़िया अतिसुन्दर

  2. Devi Kamla - October 18, 2020, 7:27 pm

    वाह वाह, अतिसुन्दर

  3. Piyush Joshi - October 18, 2020, 7:31 pm

    बहुत ही सुंदर, उम्दा

  4. Suraj Tiwari - October 18, 2020, 7:42 pm

    बहुत सुन्दर..

  5. harish pandey - October 18, 2020, 7:51 pm

    शानदार लाजवाब 👌👌

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:12 pm

    अतिसुंदर

  7. Geeta kumari - October 18, 2020, 8:23 pm

    देश प्रेम से परिपूर्ण अति सुंदर रचना। अति सुंदर प्रस्तुति

    • Satish Pandey - October 18, 2020, 10:06 pm

      इस सुन्दर टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

  8. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - October 18, 2020, 8:28 pm

    बहुत खूब वाह वाह

  9. Ramesh Joshi - October 18, 2020, 8:34 pm

    देश भक्ति की कविता बेमिसाल है

  10. Chandra Pandey - October 19, 2020, 7:46 am

    Nice, very nice poem

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