चुप रहे

वे न बोले हम न बोले
चुप रहे,
सच के आगे आज भी हम
छुप रहे,
रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा
बस अंधेरे के ही
नगमे लिख रहे।


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5 Comments

  1. Geeta kumari - January 27, 2021, 10:38 am

    कवि सतीश जी की बहुत सुंदर कविता। उत्तम लेखन

  2. Devi Kamla - January 27, 2021, 3:17 pm

    Very nice

  3. Rishi Kumar - January 27, 2021, 3:19 pm

    अति सुंदर

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 27, 2021, 7:51 pm

    अतिसुंदर भाव

  5. Suman Kumari - January 27, 2021, 7:53 pm

    बहुत सुंदर

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