जग में जब छा गया प्रकाश

कोई सो रहा हो,
शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो,
सूर्य की किरणें आएंगी,
आ कर उसे जगाएंगी
ऐसा वह सोच रहा हो
किंतु यदि उसी ने,
किरणों के प्रवेश का,
बंद कर दिया हो द्वार
तो किरणें कैसे जाएंगी उस पार
कौन उसे जगा पाएगा
कौन उसे बता पाएगा,
कि दिनकर तो कब के आ चुके
अपनी रौशनी फैला चुके,
जग में छा गया प्रकाश भी,
उसे उठाने का किया प्रयास भी,
किंतु जो जगना ही न चाहे,
उसे यह जग कैसे जगाए।
_____✍️गीता


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

भोजपुरी चइता गीत- हरी हरी बलिया

तभी सार्थक है लिखना

घिस-घिस रेत बनते हो

अनुभव सिखायेगा

10 Comments

  1. Antariksha Saha - February 11, 2021, 10:58 pm

    Nice picturization of words

  2. Rakesh Saxena - February 11, 2021, 11:18 pm

    बहुत खूब 👌

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 12, 2021, 10:32 am

    अतिसुंदर भाव

  4. sunil verma - February 12, 2021, 12:11 pm

    बहुत सुन्दर रचना

  5. Rajeev Ranjan - February 13, 2021, 7:17 am

    उम्दा

Leave a Reply