जनवरी की ठंड है

जनवरी की ठंड है
पर ढल रही सी ठंड है
कम हुआ है कोहरा
लेकिन अभी भी ठंड है।
बढ़ रहे हैं दिन
घट रही हैं रात
कटकटाना कम हुए हैं
ठंड से अब दांत।
सूर्य की किरणें में
अब बढ़ने लगा है ताप,
थम गई है निकलती
साँस से अब भाप।


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4 Comments

  1. Piyush Joshi - January 24, 2021, 7:50 am

    बहुत खूब

  2. Satish Pandey - January 24, 2021, 7:51 am

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Geeta kumari - January 24, 2021, 10:41 am

    कवियित्री चंद्रा जी की सर्दियों पर बहुत सुंदर कविता

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 25, 2021, 8:22 am

    अतिसुंदर भाव

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