जन्नत

तेरे कांधे पर, सर रख सोना चाहता हूँ।
तेरे आगोश में, सब कुछ खोना चाहता हूँ।
जन्नत सुना था, तेरी बाँहों में देख भी लिया,
दो जिस्म और एक जान होना चाहता हूँ।

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8 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 16, 2019, 3:50 pm

    वाह बहुत सुन्दर

  2. Poonam singh - September 16, 2019, 3:58 pm

    Bahut khub

  3. ashmita - September 16, 2019, 4:39 pm

    Nice

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