जय जय हो तेरी प्रभु जगन्नाथ सरकार

विषय –जगन्नाथ रथयात्रा
(*जय जय हो तेरी प्रभु जगन्नाथ सरकार*)

हरि बोल के जयकारों से
गूंज रहा सम्पूर्ण संसार
बजते ढोल नगाड़े मंजीरा,
जय जगन्नाथ स्वामी मंत्रोच्चार

रथ के लिए काष्ठ का चयन
होता बसंत पंचमी शुभवार
अक्षय तृतीया के पावन पर्व से
होता पावन रथों का निर्माण

छर-पहनरा अनुष्ठान है होता
जब होते तीनों रथ तैयार
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष में
द्वितीया की महिमा बड़ी अपार

ढोल नगाड़े तुरही बाजे मंजीरा
शंखध्वनि संग बाजे करताल
राजसी तलध्वज रथ पर बैठे
भ्राता श्री बलराम सरकार

दूजे दर्पदलन रथ पर बैठी
सुभद्रा मां करके श्रृंगार
नंदीघोष रथ पर हैं विराजे
प्रभु श्री जगन्नाथ सरकार

जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव
की शुभ मंगल बेला आई
जय घोष गूंज रही जग में
शोभा बड़ी मनोरम निराली

जगन्नाथ पुरी से चलकर
पहुंचेगी गुंडिचा द्वार
आगे- आगे बलदाऊ भैया
बीच में हैं सुभद्रा मैया
सोलह पहिये वाले रथ में
विराजें जग के पालनहार

जो भी भक्त श्रद्धा भाव से
भगवन् के रथ की करता सेवा
मोक्ष की प्राप्ति उसको होती
हो जाए भवसागर से पार
प्रभु करूं मैं तेरा सदा ही वंदन
करदो अल्पज्ञ एकता का बेड़ा पार
जय जय हो तेरी प्रभु जगन्नाथ सरकार

स्वरचित एवं मौलिक रचना
—✍️ एकता गुप्ता “काव्या”
उन्नाव उत्तर प्रदेश

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