जरा चिंगारियों के वास्ते

न रखना आंख अपनी तुम
इस तरह से सदा ही नम
जरा चिंगारियों के वास्ते
स्थान भी रखना।
किसी की बात कोई सी
न आये आपके यदि मन
उसे इग्नोर कर देना
मगर अपमान मत करना।


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7 Comments

  1. harish pandey - October 8, 2020, 9:23 pm

    बहुत ही सुंदर कविता, वाह वाह

  2. Ramesh Joshi - October 8, 2020, 9:29 pm

    बहुत खूब वाह

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 8, 2020, 9:45 pm

    बहुत खूब

  4. Geeta kumari - October 8, 2020, 10:22 pm

    बहुत सुंदर भाव , कवि सतीश जी ने किसी का भी अपमान ना करने की बहुत ही सुंदर सलाह दी है । बहुत ज्ञान वर्धक रचना

  5. Devi Kamla - October 8, 2020, 10:31 pm

    वाह वाह बहुत खूब सर

  6. Harish Joshi - October 8, 2020, 11:08 pm

    बहुत ही सुन्दर।👌👌

  7. Saurav Tiwari - October 11, 2020, 8:38 am

    👌👌bhut sundar

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